#Mypoems ❤ celebrating women's day ..
आज नारी दिवस है, सुन कर अच्छा लगता है, एक दिन बस हमारे लिए, हमारे नाम पर, गर्व करने को मन होता है, पर ये गर्व ठहरता नही, ये खुशी धूमिल हो जाती है, जब शायद आज ही के दिन कोई रेप की खबर मिल जाये। या किसी को बेटी हुई हो और घरवालों के चेहरे लटके हुए हो, या फिर शहर में छेड़खानी की घटना, किसी औरत को उसके महकमे में सिर्फ इसलिए नीचा दिखाने की घटना हो, क्योकि वो एक औरत है, या फिर घरेलू हिंसा का मामला हो। ये सब बातें, हमारे अस्तित्व पर सवाल उठाती है।
अक्सर देखा है, देवी के परम भक्त अपनी बीवी को पैर की जूती समझता है, एक नारी जागृति के लिए काम करने वाला समाज सेवी अपनी बीवी का शोषण करता है, लोगों की कथनी और करनी में बहुत फर्क है। बेटियों के उत्थान के लिए बड़ी-बड़ी बातें करने वाला घर में औरत को दबा कर रखता है। पुरूष प्रधान समाज है हमारा, उसे औरत से नीचे होना नहीं गवारा ।
हमें एक दिन का सम्मान नहीं चाहिए, एक औरत का सम्मान उसका हक होता है, जिंदगी भर के लिए, एक बेटी एक बहु एक बीवी, एक दोस्त, हर रिश्ते में, उसे सम्मान पाने का हक है, पर कितना मिलता है, ये हम सब जानते हैं, आज भी औरत को कबीर दास जी के दोहे की तरह से देखा जाता है।
"ढोल,गंवार,शूद्र, पशु, नारी"
सकल ताड़ना के अधिकारी " एक कवि विद्वान हो कर भी औरत को ले कर उनकी सोच, पुरूष ही थे, ये बताती है, जाने क्या सोच कर उन्होंने औरत की समानता पशु के साथ की ।
वक्त बदला तो है, पर कितना ? बहुत कुछ बदलना अभी शेष है। जिस दिन एक औरत को एक जिस्म से उपर एक इंसान के जैसे देखने लगेगा आदमी, उस दिन नारी दिवस मनाना सार्थक होगा। नारी देवी है, नारी पूजनीय है, नारी सम्मानीय है ये सिर्फ़ कहने की बातें है। हकीकत आज भी काफी डरावनी है। आज भी नारी लड़ रही है, अपनी जगह पाने को, जो सम्मान हमें किताबों, कहानियों में मिलता है, उसे असल में पाने को, तो पुरुष समाज से मेरा नम्र निवेदन है।
हमें बातों से मत बहलाईये, न ही हम पर तरस खाईये, आपसे ज्यादा न सही,पर आपसे कम भी नहीं हम,अब तो इतना समझ जाइये । 🙏🙏
आज नारी दिवस है, सुन कर अच्छा लगता है, एक दिन बस हमारे लिए, हमारे नाम पर, गर्व करने को मन होता है, पर ये गर्व ठहरता नही, ये खुशी धूमिल हो जाती है, जब शायद आज ही के दिन कोई रेप की खबर मिल जाये। या किसी को बेटी हुई हो और घरवालों के चेहरे लटके हुए हो, या फिर शहर में छेड़खानी की घटना, किसी औरत को उसके महकमे में सिर्फ इसलिए नीचा दिखाने की घटना हो, क्योकि वो एक औरत है, या फिर घरेलू हिंसा का मामला हो। ये सब बातें, हमारे अस्तित्व पर सवाल उठाती है।
अक्सर देखा है, देवी के परम भक्त अपनी बीवी को पैर की जूती समझता है, एक नारी जागृति के लिए काम करने वाला समाज सेवी अपनी बीवी का शोषण करता है, लोगों की कथनी और करनी में बहुत फर्क है। बेटियों के उत्थान के लिए बड़ी-बड़ी बातें करने वाला घर में औरत को दबा कर रखता है। पुरूष प्रधान समाज है हमारा, उसे औरत से नीचे होना नहीं गवारा ।
हमें एक दिन का सम्मान नहीं चाहिए, एक औरत का सम्मान उसका हक होता है, जिंदगी भर के लिए, एक बेटी एक बहु एक बीवी, एक दोस्त, हर रिश्ते में, उसे सम्मान पाने का हक है, पर कितना मिलता है, ये हम सब जानते हैं, आज भी औरत को कबीर दास जी के दोहे की तरह से देखा जाता है।
"ढोल,गंवार,शूद्र, पशु, नारी"
सकल ताड़ना के अधिकारी " एक कवि विद्वान हो कर भी औरत को ले कर उनकी सोच, पुरूष ही थे, ये बताती है, जाने क्या सोच कर उन्होंने औरत की समानता पशु के साथ की ।
वक्त बदला तो है, पर कितना ? बहुत कुछ बदलना अभी शेष है। जिस दिन एक औरत को एक जिस्म से उपर एक इंसान के जैसे देखने लगेगा आदमी, उस दिन नारी दिवस मनाना सार्थक होगा। नारी देवी है, नारी पूजनीय है, नारी सम्मानीय है ये सिर्फ़ कहने की बातें है। हकीकत आज भी काफी डरावनी है। आज भी नारी लड़ रही है, अपनी जगह पाने को, जो सम्मान हमें किताबों, कहानियों में मिलता है, उसे असल में पाने को, तो पुरुष समाज से मेरा नम्र निवेदन है।
हमें बातों से मत बहलाईये, न ही हम पर तरस खाईये, आपसे ज्यादा न सही,पर आपसे कम भी नहीं हम,अब तो इतना समझ जाइये । 🙏🙏
नारी दिवस पर अपनी मन की बातों को पिरो कर एक कविता
का रूप दिया है ।🙏🙏
ये दिन भी बीत जाएंगें, एक दिन,
फिर एक नया सवेरा होगा,
तु जो भी चाहेगी फिर, एक दिन वो तेरा होगा,
बदलते दौर में, अब तेरे जीवन में,
मिट जायेंगे, सब अंधेरे, और नया उजियारा होगा।
जितना बुलंद हौसले , उतनी उंची उड़ान,
दिन वो दूर नहीं फिर, सपने महज सपने नहीं रहेंगें,
हकीकत में हर खवाब, तेरा पूरा होगा
तु निर्बल नहीं है, ना कमजोर ही है,
शक्ति का स्वरूप है, तु ही दुर्गा, तु ही काली का रूप है
तुझसे जीवन है, तुझसे ही बंधन है,
तुम्हारे बिना कया सृष्टि का होना संभव है ?
तु अग्नि है, जल भी तु ही है
पृथ्वी तु है, तु ही ज्वालामुखी भी है,
धीर है, गम्भीर है, धरती की तकदीर है,
चमकते हुए सुरज की लाली तुझ से है,
चँदा की चाँदनी है, अम्बर की घटा भी तु है,
सागर के गहयाईयां भी तुम से है।
फूलों की नरमाईया भी तुम्ही से है।
निर्मल है, निर्भय भी है,
तु आज भी है, और कल भी है
तुमहारे बिना ये दुनिया, दुनिया नहीं होती,
तुम बिन दुनिया की, कल्पना ही नहीं होती,
प्रकृति की अनुपम सुन्दरता तुम से ही है,
ये दुनिया जो दुनिया है, वो तुम से ही है।
अदभुत हो, अविजित हो, कल्पना से भी बड़ा सच हो,
तुम माँ हो, तुम बहन हो, तुम बहु हो, बेटी भी तुम हो,
तुम पत्नी हो, प्रेयसी भी तुम ही हो,
एक अकेली तुम में, ना जाने क्या कुछ समाया है,
तु इस पूरी धरती का अदभुत सरमाया है।
तुम्हे बनाते हुए न जाने, कितने फूलों के रंग मिलायें होगें,
कितने इत्रों की खुशबु डाली होगी,
कितने सपनों को पंख लगाये होंगे,
कहाँ से इतना प्यार लाया होगा,
जो तुझ में समाया होगा,
ममता की इस मूरत को, किस मिट्टी से बनाया होगा ।
नदियों से जुनून लिया होगा, पर्वतों से धैर्य,
आसमां से ऊचाईयां ली होगी, धरती से संयम,
फूलों से रंग और खुशबुएँ ली होंगी,
नदियों से चंचलता, सागर से गहराइयां ली होंगी,
और सूरज से प्रबलता,
खुश तो बहुत वो उपर वाला भी हुआ होगा
तुमको बना कर ,अपने आप पर इठलाया होगा।
खुब जश्न मना होगा जन्नत में भी,जिस दिन,
उसने औरत,जैसी नायाब कृति को बनाया होगा .....
पर क्या सच ही सिर्फ सच है,
बातों में हमें, बहुत मान दिया गया है,
नारी दिवस के रूप में सम्मान दिया गया है,
पर असल में वो दिन जब आयेगा
जब औरत को उसके जिस्म से उपर,
एक इंसान समझा जाएगा,
जब घर से बाहर कोई अपनी,
नापाक नजरें उसके जिस्म पर नहीं गड़ाएगा,
जब बेटियाँ पैदा करने पर अफसोस नहीं होगा,
जब किसी की इज्जत न सरेआम रौंदा जाएगा,
जब औरत को उसके इंसान होने का हक मिलेगा,
वो दिन सही में "नारी दिवस होगा।
का रूप दिया है ।🙏🙏
ये दिन भी बीत जाएंगें, एक दिन,
फिर एक नया सवेरा होगा,
तु जो भी चाहेगी फिर, एक दिन वो तेरा होगा,
बदलते दौर में, अब तेरे जीवन में,
मिट जायेंगे, सब अंधेरे, और नया उजियारा होगा।
जितना बुलंद हौसले , उतनी उंची उड़ान,
दिन वो दूर नहीं फिर, सपने महज सपने नहीं रहेंगें,
हकीकत में हर खवाब, तेरा पूरा होगा
तु निर्बल नहीं है, ना कमजोर ही है,
शक्ति का स्वरूप है, तु ही दुर्गा, तु ही काली का रूप है
तुझसे जीवन है, तुझसे ही बंधन है,
तुम्हारे बिना कया सृष्टि का होना संभव है ?
तु अग्नि है, जल भी तु ही है
पृथ्वी तु है, तु ही ज्वालामुखी भी है,
धीर है, गम्भीर है, धरती की तकदीर है,
चमकते हुए सुरज की लाली तुझ से है,
चँदा की चाँदनी है, अम्बर की घटा भी तु है,
सागर के गहयाईयां भी तुम से है।
फूलों की नरमाईया भी तुम्ही से है।
निर्मल है, निर्भय भी है,
तु आज भी है, और कल भी है
तुमहारे बिना ये दुनिया, दुनिया नहीं होती,
तुम बिन दुनिया की, कल्पना ही नहीं होती,
प्रकृति की अनुपम सुन्दरता तुम से ही है,
ये दुनिया जो दुनिया है, वो तुम से ही है।
अदभुत हो, अविजित हो, कल्पना से भी बड़ा सच हो,
तुम माँ हो, तुम बहन हो, तुम बहु हो, बेटी भी तुम हो,
तुम पत्नी हो, प्रेयसी भी तुम ही हो,
एक अकेली तुम में, ना जाने क्या कुछ समाया है,
तु इस पूरी धरती का अदभुत सरमाया है।
तुम्हे बनाते हुए न जाने, कितने फूलों के रंग मिलायें होगें,
कितने इत्रों की खुशबु डाली होगी,
कितने सपनों को पंख लगाये होंगे,
कहाँ से इतना प्यार लाया होगा,
जो तुझ में समाया होगा,
ममता की इस मूरत को, किस मिट्टी से बनाया होगा ।
नदियों से जुनून लिया होगा, पर्वतों से धैर्य,
आसमां से ऊचाईयां ली होगी, धरती से संयम,
फूलों से रंग और खुशबुएँ ली होंगी,
नदियों से चंचलता, सागर से गहराइयां ली होंगी,
और सूरज से प्रबलता,
खुश तो बहुत वो उपर वाला भी हुआ होगा
तुमको बना कर ,अपने आप पर इठलाया होगा।
खुब जश्न मना होगा जन्नत में भी,जिस दिन,
उसने औरत,जैसी नायाब कृति को बनाया होगा .....
पर क्या सच ही सिर्फ सच है,
बातों में हमें, बहुत मान दिया गया है,
नारी दिवस के रूप में सम्मान दिया गया है,
पर असल में वो दिन जब आयेगा
जब औरत को उसके जिस्म से उपर,
एक इंसान समझा जाएगा,
जब घर से बाहर कोई अपनी,
नापाक नजरें उसके जिस्म पर नहीं गड़ाएगा,
जब बेटियाँ पैदा करने पर अफसोस नहीं होगा,
जब किसी की इज्जत न सरेआम रौंदा जाएगा,
जब औरत को उसके इंसान होने का हक मिलेगा,
वो दिन सही में "नारी दिवस होगा।
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